Author Anvaya Baranwal

Being a person of finance by my profession, I have always been a person of literature by my heart be it writing or reading. Poetry for me is just an extension to extinguish the quest for deeper form of literature.

Poetry shaurya poem by anvayana baranwal
शौर्य
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पठानकोट के धमाको से आंखे तो खुली होंगी, गर अब भी हथेली मुट्ठी ना बनी तो ये बुजदिली होगी। यकीन है की ऊंघती सरकारें जागेंगी इस…

Poetry Ankahi poem by Anvaya BaranwalAnkahi poem by Anvaya Baranwal
अनकही
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यूँ ही नहीं बीतती करवटों में रातें, इस रात की ख़ामोशी में तेरी यादों का शोर बहुत है। अब कहाँ वो लड़कपन की चाहते वो शरारतें,…

Poetry
शफ़क़त
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रात की ख़ामोशी थी तन्हाई का सहारा था, हज़ारो ख्याल दिल को छू गए हर ख्याल में ज़िक्र तुम्हारा था। कहीं महफ़िल बेनूर थी कहीं तन्हाई…

Poetry Safar by Anvaya
सफ़र
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ना शाखाओ ने जगह दी ना आंधियो ने बख्शा, बता वो पत्ता जाये भी तो कहां जाये। गर्द नाकामियों की इतनी चढ़ी है, अब चेहरा भी…