Author Arjun Awasty

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Poetry mausam poem by Arjun Awasty
मौसम ||
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बालों को सहलाती ये सर्द हवाएं , गुज़रे दिन की हसीन शाम है | तपती दोपहरो में रोज़ कुछ पिघलते , उस गरीब की बेचैन रातो…