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Poetry
शफ़क़त
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रात की ख़ामोशी थी तन्हाई का सहारा था, हज़ारो ख्याल दिल को छू गए हर ख्याल में ज़िक्र तुम्हारा था। कहीं महफ़िल बेनूर थी कहीं तन्हाई…