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Poetry Ankahi poem by Anvaya BaranwalAnkahi poem by Anvaya Baranwal
अनकही
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यूँ ही नहीं बीतती करवटों में रातें, इस रात की ख़ामोशी में तेरी यादों का शोर बहुत है। अब कहाँ वो लड़कपन की चाहते वो शरारतें,…

Poetry Aakhiri Khat- A nazm by Nitish
आख़िरी ख़त
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तुम्हारा एक पुराना ख़त आज अलमारी के कोने में पड़ा मिला धूल जमी हुई थी कुछ उस पर हल्का सा झाड़ा और धूल हटी तो याद…